Monday, September 16, 2019

खरीफ उपार्जन 2019 - 20 पंजीयन

किसान भाइयों एवं बहनों,
खरीफ उपार्जन 2019 - 20 में 
पंजीयन करायें
खरीफ उपार्जन 2019 - 20 पंजीयन

सभी किसान भाइयों से निवेदन हैं कि समय से आप अपने सभी आवश्यक दस्तावेजो के साथ अपनी फसल का पंजीयन करा लें ।
अगर किसान भाइयों को किसी प्रकार की समस्या होती हैं तो वह सी.एम. हेल्पलाइन (181) पर सम्पर्क कर सकते हैं
मैं उम्मीद करता हू की आपको लेख पसंद आएगा एवं यह जानकारी आपको पंजीयन कराने में सहायक सिध्द होगी ।
                                                    पंजीयन की फसलें - धान, ज्वार एवं   बाजारा ।

पंजीयन अवधी - 16 सितंबर से 16 अक्टुबर 2019।
 समय : प्रातः 08 से रात 08 बजे तक ।

पंजीयन निम्न स्थानों  पर किया जा सकता है :

  • एम पी किसान एप्प (राजस्व विभाग) ।
  • ई उपार्जन मोबाइल एप्प।
  • ई उपार्जन पोर्टल पर (पब्लिक डोमेन में ) ।
  • विगत खरीफ के 1095 उपार्जन केंद्रों पर।

समर्थन मूल्य प्रति क्विंटल :
  • धान कामन 1815 रुपये ।
  • धान ग्रेड A 1835 रुपये ।
  • ज्वार 2550 रुपये ।
  • बाजरा 2000 रुपये ।

 पंजीयन हेतु आवश्यक दस्तावेज :


  • भू-स्वामियों को पंजीयन हेतु दस्तावेज की आवश्यकता नही।
  • केवल सिकमी एवं वन पट्टाधारी किसान को सिकमी अनुबंध एवं पट्टे की प्रति देनी होगी।(सिकमी एवं वन पट्टाधारी किसान को सिर्फ उपार्जन केंद्र पर पंजीयन कराना होगा।) 
  • पंजीयन में भूमि का रकबा एवं फसल की जानकारी गिरदावरी से ली जावेगी। (सहमत न होने पर गिरदावारी में अपील का प्रावधान)
  • किसान का विवरण, बैंक खाता एवं मोबाइल की जानकारी विगत वर्ष के पंजीयन डाटा से ।
  • किसान को बैंक खाता एवं मोबाइल नंबर में OTP आधारित संशोधन  की सुविधा ।


शिकायत/ समस्या होने पर सी.एम. हेल्पलाइन 181 पर संपर्क करें।

"किसान भाइयो से अनुरोध है कि समय पर पंजीयन करा ले । उपज विक्रय के समय समस्त सम्बंधित दस्तावेज साथ में लावे। बैंक खाता अपडेट रखे ताकि आपको भुगतान में सुविधा हो।"
प्रद्युम्न सिंह तोमर 
मंत्री खाद्य,नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण।

Friday, September 13, 2019

प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना

अन्यदाता की मेहनत को संबल,
       पेंशन से सुरक्षित उनका कल

     प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना     

  लघु और सीमांत किसानों के लिए पेंशन

प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना


किसानों को 60 साल की उम्र के बाद पेंशन देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश के किसानों की लिये प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना प्रारंभ की हैं, इसमे 18 से 40 वर्ष के किसान लाभ ले सकेंगे एवं उन्हें 60 वर्ष उम्र के बाद प्रति माह पेंशन दी जावेगी। 

योजना का शुभारंभ :
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा  12 सितम्बर, 2019 को दोपहर 12:00 बजे राँची, झारखंड से ।

योजना की मुख्य विशेषताएं :

  • स्वैच्छिक और अंशदायी पेंशन योजना ।
  • मासिक योगदान 55 से 200 रुपये ।   
  • भारत सरकार द्वारा भी प्रतिमाह बराबर राशि का अंशदान।
  • 60 वर्ष की आयु होने पर न्यूनतम रुपये 3000/- मासिक पेंशन ।
  • पेंशन का भुगतान LIC के द्वारा ।
       प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना  
योजना की पात्रता :
  • योजना में प्रवेश की आयु 18 वर्ष से 40 वर्ष हैं।
  • दो हैक्टेयर तक के कृषि भूमि वाले लघु एवं सीमांत किसान।

किसान मानधन योजना  

योजना में नामांकन की प्रक्रिया :
  1. कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) अथवा नोडल ऑफिसर (पीएम - किसान ) से नि: शुल्क नामांकन।
  2. नामांकन व बैंक खाते से ऑटो - डेबिट करने के फार्म पर हस्ताक्षर करें ।
  3. आधार संख्या/कार्ड ,बैंक खाते का विवरण एवं कृषि भूमि वाले दस्तावेज अनिवार्य।
  4. प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना का कार्ड आपको तुरंत जारी कर दिया जायेगा

प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (पेंशन)


Tuesday, September 3, 2019

कुफ़री नीलकंठ : एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर आलू की किस्म


कुफ़री नीलकंठ
Kufri Neelkanth

एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर आलू की किस्म कुफ़री नीलकंठ जो कि आईसीएआर-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान,शिमला के द्वारा विकसित की गई हैं।
जो कि जल्द ही किसानों को खेती के लिए उपलब्ध होगी।
आलू को सब्जियों का राजा कहा जाता हैं एवं आलू का महत्व इस बात से लगाया जा सकता कि भारत मे प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष लगभग 25 किलोग्राम आलू खाया जाता हैं।
कुफ़री नीलकंठ एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण यह लोगो मे रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाने में सहायक होगा ।

आइये जानते हैं कुफ़री नीलकंठ के गुणों को :
  • कुफ़री नीलकंठ मध्यम अवधि में पकने वाली आलू की नई किस्म हैं जो मुख्यतः उत्तरी भारत के मैदान के लिये उपयुक्त हैं।
  • कुफ़री नीलकंठ एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर हैं जिसमें एंथोसायनिन एवं कैरोटीनॉयड मुख्य हैं। 
  • अनुकूलतम कृषि क्रियाओ के द्वारा इसका उत्पादन 35 से 38 टन/हेक्टेयर तक लिया जा सकता हैं।
  • कुफ़री नीलकंठ के कंदो का रंग गहरा बैंगनी काला हैं।
  • इसके कंद मध्यम गहरी आंखों के साथ अंडाकार आकार के होते हैं एवं मध्यम शुष्क पदार्थ (18%) होता हैं।
  • कुफ़री नीलकंठ में मध्यम अवधि की सुसुप्तावस्था होती हैं एवं स्वाद भी उत्तम हैं।
  • यह पछेती झुलसा के प्रति सहनशील हैं जो कि आलू की मुख्य बीमारियों में एक हैं।


Wednesday, August 28, 2019

सोयबीन के प्रमुख कीट एवं उनका नियंत्रण


1. ब्लू बीटल :


नियंत्रण -
क्लोरोपायरीफॉस या क्यूनालफॉस 1.5 लीटर प्रति हेक्टेयर।

2. गर्डल बीटल :


नियंत्रण - 

1. ट्राइज़ोफॉस 0.8 लीटर प्रति हेक्टेयर या
2. इथोफेनप्राक्स 1 लीटर प्रति हेक्टेयर या 
3. थायोक्लोप्रिड 0.75 लीटर प्रति हेक्टेयर 
4.मिथाइल पेराथियोन 50 EC 1.25 लीटर प्रति हेक्टेयर ।

3. सेमीलूपर इल्ली :



नियंत्रण - 

जैविक नियंत्रण हेतु बेसिलस युरिजिएंसिस या ब्यूवेरिया बेसियान 1 लीटर या 1 किलो प्रति हेक्टेयर।

4.तम्बाकू की इल्ली एवं रोयेंदार इल्ली :



नियंत्रण - 

1. क्लोरोपायरीफॉस 20 EC 1.5 लीटर प्रति हेक्टेयर या
2.इंडोक्साकार्व 14.5 SP 0.5 लीटर प्रति हेक्टेयर या
3.रेनेक्सीपायर 20 EC 0.10 लीटर प्रति हेक्टेयर।

5. तना मक्खी या सफ़ेद मक्खी :



नियंत्रण - 

1.थायोमिथाक्सम 25 WG 100 ग्राम प्रति हेक्टेयर।

Friday, August 23, 2019

रोशा घास की खेती

रोशा घास की खेती

भारत का स्थान क्षेत्र एवं उत्पादन में विश्व में प्रथम हैं। किसानों को परम्परागत खेती की तुलना में रोशा घास की खेती अधिक लाभ दिला सकती हैं साथ ही इसे छोटे व सीमांत किसान कम उर्वरक भूमि पर भी सुगमता से उगा सकते हैं। वर्तमान में रोशा घास की खेती,उत्तर प्रदेश, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक,हरियाणा, गुजरात, व मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर हो रही हैं।

परिचय

भारत में सुगंधित तेल के उत्पादन में रोशा घास के तेल का महत्वपूर्ण स्थान हैं।
रोशा घास जिसे पामारोजा के नाम से भी जानते हैं यह एक बहुवर्षीय सुगंधित घास हैं, इसकी कटाई एक वर्ष में कई बार की जा सकती हैं। पारम्परिक रूप से उगाई जाने वाली फसलों की तुलना में रोशा घास की खेती ज्यादा लाभदायक है। यह कम लागत में अधिक लाभ देने वाली फसल हैं। रोशा घास की फसल एक बार लगाकर इससे 3 से 6 वर्षो तक उपज ली जा सकती हैं साथ ही इसकी खेती भारत के शुष्क प्रदेशो में भी सफलता पूर्वक की जा सकती हैं।

लवायु एवं तापमान 

रोशा घास हेतु गर्म एवं आद्र जलवायु उपयुक्त मानी जाती हैं। तेल की अच्छी मात्रा एवं अच्छी गुणवत्ता के लिए गर्म एवं शुष्क जलवायु बेहतर मानी जाती हैं । 
रोशा घास की फसल 10 ℃ से 45 ℃ तक के ताप को सहन करने में सक्षम होती हैं।

मृदा एवं पी. एच्.

रोशा घास उपजाऊ भूमि से लेकर खराब खेती में भी इसकी खेती की जा सकती हैं। उचित जल निकास वाली मृदाए जिनका पी. एच्. 7.5 से 9.0 तक होता हैं ऐसी मृदाओं में भी रोशा घास की खेती की जा सकती हैं। इसकी खेती शुष्क एवं अर्धशुष्क क्षेत्रों में भी वर्षा आधारित फसल के रूप में भी की जा सकती हैं।

खेत की तैयारी 

रोशा घास की खेती के लिए खेत को अच्छी तरह से जोत कर मिट्टी को भुरभुरी कर लेना चाहिए। खेत को कल्टीवेटर की मदद से कम से कम दो बार जोतना चाहिए साथ ही खेत में गोबर की सड़ी हुईं खाद को 10 से 15 टन प्रति हैक्टर की दर से मिलाना चाहिए।

रोपाई या बुबाई

रोशा घास के पौधों का प्रसारण सीधे जड़दार पौधों, सीधे बीज की बुबाई एवं पहले नर्सरी में पौधें तैयार कर रोपण किया जा सकता हैं। व्यवसायिक खेती के लिए नर्सरी से उनका रोपण करना उपयुक्त माना जाता हैं।
नर्सरी हेतु उठी हुई क्यारियां बनाकर उसमें सड़ी हुई गोबर की खाद या  वर्मीकम्पोस्ट अच्छी तरह मिलाकर उसकी सिंचाई कर दी जाती हैं।
1 हैक्टर खेत की रोपाई हेतु 400 से 500 वर्गमीटर क्षेत्रफल में नर्सरी बनाते हैं, बीज की मात्रा 2.5 किलोग्राम प्रति हैक्टर पर्याप्त होती हैं, बीज को रेत के साथ मिलाकर 15 से 20 सेंटीमीटर की दूरी एवं 1 से 2 सेंटीमीटर की गहराई पर पंक्ति में या नर्सरी में छिटक कर बोना चाहिए।
नर्सरी की लगातार समय समय पर सिंचाई कर नम रखना चाहिए । नर्सरी लगाने का सर्वोत्तम समय अप्रैल से मई में होता हैं। नर्सरी लगभग 4 सप्ताह के बाद खेत में रोपाई के लिये तैयार हो जाती हैं, खेत की रोपाई से पूर्व सिंचाई कर दी जाती हैं एवं नर्सरी को भी नम कर दिया जाता हैं।
नर्सरी के स्वस्थ पौधें उखाड़कर (20 से 25 सेंटीमीटर लंबे) खेत मे 60×30 सेंटीमीटर की दूरी पर रोपाई करना चाहिए। पौधें अधिक लंबे होने पर ऊपर से काट देना चाहिए एवं रोपाई के बाद सिंचाई कर देना चाहिए।

सिंचाई 

सिंचाई की आवश्यकता मौसम पर निर्भर करती हैं। वर्षा ऋतु में सिंचाई की आवश्यकता नही होतीं हैं। सर्दी या शरद ऋतु  के मौसम में 2 सिंचाई पर्याप्त रहती हैं साथ ही गर्मी में 3 से 4 सिंचाई की आवश्यकता होती हैं।
प्रत्येक कटाई के बाद सिंचाई अवश्य करना चाहिए।

उर्वरक 

रोशा घास ग्रेमीनी (घास) परिवार का हैं अतः इसे नाइट्रोजन 150 किलोग्राम, फॉस्फोरस 50 किलोग्राम, पोटास 50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष देना चाहिए एवं 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर देने से उपज में वृद्धि होती हैं। फसल की कटाई बाद में 40 किलोग्राम नाइट्रोजन को 3 भागो में देना चाहिए।
नोट - नाइट्रोजन की आवश्यक मात्रा ही डालना चाहिए क्योंकि नाइट्रोजन की ज्यादा मात्रा हानिकारक हो सकती हैं।

फसल सुरक्षा

रोशा घास एक सहिष्णु फसल हैं, इस पर विशेष कीट एवं रोगो के द्वारा हानि नही होती फिर भी अगर एफिड, थ्रिप्स,व्हाइट ग्रब का प्रकोप होने पर इनके नियंत्रण के लिए रोगर (0.1%) मोनोक्रोटोफॉस कीटनाशी का छिड़काव करना चाहिए।

कटाई का समय

फसल की कटाई जमीन से 15 से 20 सेंटीमीटर ऊपर से पौधे को 50 % फूल की अवस्था आने पर कटाई करना चाहिए। फसल को काटने के बाद एक दिन धूप में सुखाकर या दो दिनो तक छाया में सुखाने के बाद आसवन करने से कम खर्च में अधिक तेल प्राप्त किया जा सकता हैं।
रोशा घास की खेती उपजाऊ भूमि के साथ - साथ कम उपजाऊ ऊसर भूमि, 9 पी. एच्. मान वाली भूमि, कम जल उपलब्ध्ता वाले क्षेत्र एवं यूकेलिप्टस जैसे वृक्षों के मध्य भी सफलता पूर्वक खेती कर सकते हैं।
रोशा घास के सभी भागों जैसे फूल, पत्ती, तथा तना आदि में तेल की मात्रा होती हैं किंतु फूल वाला सिरा तेल का प्रमुख भाग होता हैं। इसके तेल पर विपरीत परिस्थितियों का हानिकारक प्रभाव नही पड़ता हैं।

उन्नत किस्मे

सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय तथा सुगंधित पौधा संस्थान (सीमैप), लखनऊ एवं संबंधित अनुसंधान केंद्र रोशा घास की खेती करने के लिए किसानों की मदद करता है और उन्हें बीज भी उपलब्ध कराता है। रोशा घास की कुछ उन्नतशील किस्मों को सीएसआईआर-सीमैप द्वारा विकसित किया गया है, जिनमे मुख्य प्रजातियाँ पीआरसी-1, तृष्णा, तृप्ता, वैष्णवी और हर्ष है |

उपज एवं कमाई

तेल का प्रतिशत, शाक एवं तेल की उपज जलवायु एवं कृषि कार्य पर निर्भर करता हैं। तेल की पैदावार पहले वर्ष कम एवं उम्र के साथ - साथ इसमें वृद्धि होती हैं।
औसतन रोशा घास में 0.5-0.7% तेल पाया जाता हैं। उचित प्रबंधन में तेल की औसतन उपज 200 से 250 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष प्राप्त की जा सकती हैं। इस प्रकार पहले साल 120,000 से 140,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तक शुद्ध लाभ प्राप्त किया जा सकता हैं जो आने वाले सालों में अपेक्षाकृत अधिक हो जाता हैं।

Wednesday, August 14, 2019

फसलो में फूल की अवस्था पर रसायनों के छिड़काव हो सकते हैं हानिकारक

फसलो में फूल की अवस्था पर रसायनों के छिड़काव हो सकते हैं हानिकारक
प्रिय किसान भाई नमस्कार
*आज में आप से बड़े ही रोचक विषय पर विचार विमर्श करूंगा बड़े ही ध्यान से पड़ना*
 इस समय लगभग सभी के सोयाबीन फूल वाली अवस्था के अंत में है , अगर आपकी सोयाबीन भरपूर फूल अवस्था में है तो किसी भी प्रकार की दवाई के स्प्रे से बचे , क्यूंकि दवाई के केमिकल अगर फूल में गया तो उसको फली में परिवर्तित होने से रोक सकता है अर्थात फूल के पराग कण मर सकते है , 

चलो आज में आपको बाजार में जो सबसे रोमांचक किसान को बेवकूफ बनाने के फार्मूले के बारे में रूबरू करता हूं, आप दुकान पर जाते हो और दुकानदार कहता है टानिक चाइए आप कहोगे क्या काम करेगा वो कहेगा फूल बड़ाएगा ज्यादा फूल तो ज्यादा उत्पादन और जितना महंगा लोगे , उतना अच्छा रिजल्ट...

आपने महंगी टॉनिक खरीदी यार महंगा है कुछ तो दम होगी !
भाईसाहब किसान गांव आए मूंछ में ताव देते 
फसल की अवस्था का कोई ध्यान ही नहीं फसल में छिड़काव किया कुछ दिन बाद फसल एक दम हरी भरी , अरे मज़ा आ गया ।
अरे महाशय आपने जो डाला उसने पता नहीं क्या था और फसल में क्या कार्य करेगा आपकी फसल की बढ़वार खूब हो रही किन्तु फूल और फल कम क्यो बन रहे ( सत्य यह है की दुनिया की कोई भी ऐसी दवाई नहीं जो एक फूल से दो फूल बना दे सामान्य अवस्था में ), *( फूल बढ़ाना हो तो संतुलित मात्रा में पोषक तत्व फसल की आवश्यकता के हिसाब से दे )* फिर बाजार गया दौड़ लगाकर भाई फिर से यूरिया की कट्टी उठा लाया दिया धर के फसल और हरी भरी , और पोेधे की यूरिया बनाने की ग्रन्थियां सडा दी सत्यनाश कर दिया फसल का 
अब किसान भाई इल्ली की दवाई लेने गये खेत में इल्ली कुछ ओर और अन्य इल्ली मार ले आया वो भी घटिया कंपनियों की ओर डोस बताया कुछ और दिया धर के कुछ ओर अब इल्लिया रानी दवाई के प्रति सहन शील हो गई कोई दवाई का असर नहीं।

अब समय आता हैं फसल कटाई का और परिणाम.... 
अरे ये क्या हो रहा फसल को थ्रेसर में दबा दबा के डाल रहा है साला दाने किधर गए 
बगदा को तो ढेर लगी ग्यो दानो कथे ग्यों 
कथा का सार जैसे हमें भूख लगती है तो हम खाना खा के ही भूख शांत कर सकते है ना कि रात दिन दवाई गोली खा कर ..।
इसी प्रकार पोधों को 17 तरह के पोषक तत्व की आवश्यकता होती है निश्चित अनुपात में अच्छे उत्पादन के लिए , हम जमीन में गोबर की खाद या अन्य खाद तो देते नहीं यूरिया , डी ए पी आदि उर्वरकों को ही डालते रहते है वो भी जब मर्जी चाहे वो भी ना जाने कितनी मात्रा।
 सभी किसान भाइयों से निवेदन हैं कि आप बेबजह की रासायनिक दवाइयों का प्रयोग न करें और अतिरिक्त ख़र्च न करें।
आज के लिए इतना ही,
कहानी बहुत ही गहरी है इसे मजाक में ना ले समय पर संभल जाओ और ये किसी व्यक्ति विशेष हेतु नहीं है ये सामान्य घटना है अगर मेरे विचार बुरे लगे तो हांथ जोड़ कर छमा प्रार्थना।

सभी से विनम्र निवेदन हैं कि जानकार बने सतर्क रहें.....!
जय किसान

Tuesday, July 23, 2019

दूध की शुद्धता की पहचान कैसे करें ?

क्या आप के यहां आने वाला दूध शूद्ध है
या फिर मिलावटी...?


आइये जानते हैं मिलावटी दूध की पहचान कैसे करें....

1) पानी की मिलावट की जांच :-

कोई भी उथली प्लेट या कोई भी बर्तन लेकर ढलान पर रखें बर्तन की सतह पर दूध की कुछ बूंदें डालें !
अगर दूध शुद्ध है तो दूध की बूंदें धीरे धीरे सफेद लकीर छोड़ते हुए नीचे आ जायेगी जबकि अगर दूध में पानी मिला हुआ है तो दूध की बूंद बिना कोई निशान छोड़े बह जायगी ! या गाढ़ा दूध नीचे रह जायेगा और हल्का पानी आगे निकल जायेगा ।

Friday, July 19, 2019

किसानो की कर्जमाफी पर विशेषज्ञों की राय


भारत में किसानो की कर्जमाफी का वादा राजनीति में चुनाव जीतने का गारंटेड फॉर्मूला बनता जा रहा हैं।
किसानो की कर्जमाफी होती भी हैं किन्तु किसानो की हालात देश में जस की तस हैं उनके जीवन स्तर में कोई सुधार नहीं होता हैं।