Wednesday, October 31, 2018

मधुमक्खी पालन या Apiculture

                     मधुमक्खी पालन 

मधुमक्खी पालन एक बहुत ही बेहतर सहायक धंधा साबित हो सकता हैं अगर आप कृषि से जुड़े हैं क्योकि मधुमक्खी पालन एक ऐसा व्यवसाय हैं जो आप को शहद तो प्रदान करता ही हैं साथ ही फसलो के परागण में बहुत ही महत्वपुर्ण भूमिका निभाता हैं।
फसलों में होने वाले परागण में मधुमक्खी का योगदान बहुत अधिक होता हैं अतः आप अपने कृषि के साथ मधुमक्खी पालन करते हैं तो यह आपके लिए "मील का पत्थर" साबित होगा ।





परिचय : 

मधुमक्खी पालन एक ऐसा व्यवसाय हैं जिसके लिए न तो किसी बड़े भूखंड की आवश्यकता हैं न ही किसी इमारत और न ही बिजली की । इसे हम बहुत ही कम पूंजी के साथ 3 से 5 मधुमक्खी ब्रीड या बक्से रख कर शुरू कर सकते हैं जो आने वाले 3 से 4 वर्षो में 50 से 100 तक हो सकते हैं । यह एक कृषि आधारित व्यवसाय हो जो कम लागत में अधिक मुनाफा दे सकता हैं।

मधुमक्खी पालन में निम्न बातो का ध्यान रखना चाहिए -

1. मौसम का सही चुनाव :

मधुमक्खी पालन शुरू करते समय मौसम के चयन का विशेष तौर पर ध्यान रखना चाहिए क्योकि अगर आप खरीफ के मौसम का चयन करते हैं तो यह मधुमक्खी पालन के लिए अच्छा नहीं होता हैं । इस दौरान फूल ज्यादा नहीं खिलते हैं अतः इस मौसम को डेथ पीरियड भी कहा जाता हैं और इस दौरान मधुमक्खी के पालन के लिए उसे भोजन के रूप में शक्कर का घोल देंना आवश्यक हो जाता हैं।

2. मधुमक्खी पालन में काम आने वाले यंत्र :


1. मधुमक्खी बॉक्स 
2. रानी रोग पट
3. धुआंकर
4. दस्ताना
5. नकाव
6. डमी बोर्ड
7. भोजन पात्र
8. छीलन छुरी 
9. बी(मधुमक्खी) ब्रश
10. पोलन(pollen) ट्रैप 
11. क्वीन एक्सक्लूडर
12. आधार छत्ता बनाने की मशीन 
13. बी हाइभ टूल
14. कवीन केज 
15.पोशाक ।

3. मधुमक्खी के बारे में :


मधुमक्खी एक सामाजिक प्राणी हैं जो कि एक परिवार में रहता हैं इसके परिवार में रानी,श्रमिक और नर होते हैं ।

रानी मधुमक्खी :

रानी मधुमक्खी 1 ही होती हैं जो कि आकार में सबसे बड़ी होती हैं जिसका काम अंडे देना होता हैं।

श्रमिक : 

इनकी संख्या सबसे ज्यादा होती हैं । इनका काम मधु इकठ्ठा करना, छत्ता बनाना, आदि काम करते हैं।

नर/ड्रोनड्रोन :

इनकी संख्या भी बहुत कम होती हैं । ये श्रमिक के मुकाबले 4 गुना अधिक खाते हैं ,भोजन के कम होने की स्थिति में श्रमिको द्वारा इन्हें बाहर निकाल दिया जाता हैं या फिर मार दिया जाता हैं।


4. मधुमक्खी की प्रजातियां :

मधुमक्खी की अनेक प्रजाति पाई जाती हैं जिसमे Apis mellinpona,Apis florea, Apis dorsata, Apis indica, Apis mellifera etc.
Apis mellifera प्रजाति यूरोप में पाई जाती हैं । Apis mellifera की एक इटालियन प्रजाति को आजकल हमारे देश में मुख्य रूप से पाला जाता हैं।
इसका पालन हमारे देश में 1962 से हिमाचल प्रदेश से शुरू हुआ जो धीरे धीरे पुरे देश में फेल गया और आज लगभग सम्पूर्ण क्षेत्र में इसका पालन किया जाता हैं।

5. मधु का उत्पादन :

इटालियन प्रजाति की मधुमक्खी के एक बॉक्स से एक साल में लगभग 60 से 80 KG तक अच्छी गुणवत्ता की मधु प्राप्त की जा सकती हैं।

6. मधु का शोधन :

शहद या मधु को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिये इसका शोधन आवश्यक हो जाता हैं क्योकि मधु निकालते समय इसमें कुछ अवशिष्ट पदार्थ मिल जाते हैं जिस कारण मधु ख़राब होने लगता हैं।
मधु को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए इसमें 18 % से अधिक नमी नहीं होना चाहिए ।
शहद का शोधन वाटर वाथ विधि से किया जाता हैं जिसे घर पर भी किया जा सकता हैं।

7. पैकेजिंग व बॉटलिंग :

आमतौर पर हमारे देश में पैकेजिंग हाथो से की जाती हैं जिससे पैकेजिंग के दौरान उसमे कुछ अशुद्धि मिलने की संभावना बड़ जाती हैं। मधु को एक विशेष आकर की बोतल में भरा जाता हैं।

8. मार्केटिंग :

मधु उत्पादन के बाद इसे बाजार की स्पर्धा में उतारना एवं उसे बाजार में बनाये रखना साथ ही तैयार होने पर उचित दाम में बेचना सबसे बड़ी चुनोती होती हैं। इसके लिये हमें अपनी मधु को आकर्षक बोतल में भरकर अच्छी गुणवत्ता रखकर बेचना चाहिए ।

9. प्रशिक्षण :

मधुमक्खी पालन के लिए आप प्रशिक्षण खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के प्रशिक्षण केंद्र से ले सकते हैं।

मधुमक्खी पालन व्यवसाय करते समय ध्यान रखने योग्य बाते :

1. हमे अपना व्यवसाय शुरू करते समय मौसम के चयन का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। 
2. मधुमक्खी की कॉलोनी में उसकी क्रियाकलाप पर पैनी निगरानी रखनी चाहिये।
3. मधु निकालने का सही समय चयन करना चाहिये इसमें जल्दवाजी नहीं करना चाहिए ।


5 comments:

Share and comment