Wednesday, August 14, 2019

फसलो में फूल की अवस्था पर रसायनों के छिड़काव हो सकते हैं हानिकारक

प्रिय किसान भाई नमस्कार
*आज में आप से बड़े ही रोचक विषय पर विचार विमर्श करूंगा बड़े ही ध्यान से पड़ना*
 इस समय लगभग सभी के सोयाबीन फूल वाली अवस्था के अंत में है , अगर आपकी सोयाबीन भरपूर फूल अवस्था में है तो किसी भी प्रकार की दवाई के स्प्रे से बचे , क्यूंकि दवाई के केमिकल अगर फूल में गया तो उसको फली में परिवर्तित होने से रोक सकता है अर्थात फूल के पराग कण मर सकते है , 

चलो आज में आपको बाजार में जो सबसे रोमांचक किसान को बेवकूफ बनाने के फार्मूले के बारे में रूबरू करता हूं, आप दुकान पर जाते हो और दुकानदार कहता है टानिक चाइए आप कहोगे क्या काम करेगा वो कहेगा फूल बड़ाएगा ज्यादा फूल तो ज्यादा उत्पादन और जितना महंगा लोगे , उतना अच्छा रिजल्ट...

आपने महंगी टॉनिक खरीदी यार महंगा है कुछ तो दम होगी !
भाईसाहब किसान गांव आए मूंछ में ताव देते 
फसल की अवस्था का कोई ध्यान ही नहीं फसल में छिड़काव किया कुछ दिन बाद फसल एक दम हरी भरी , अरे मज़ा आ गया ।
अरे महाशय आपने जो डाला उसने पता नहीं क्या था और फसल में क्या कार्य करेगा आपकी फसल की बढ़वार खूब हो रही किन्तु फूल और फल कम क्यो बन रहे ( सत्य यह है की दुनिया की कोई भी ऐसी दवाई नहीं जो एक फूल से दो फूल बना दे सामान्य अवस्था में ), *( फूल बढ़ाना हो तो संतुलित मात्रा में पोषक तत्व फसल की आवश्यकता के हिसाब से दे )* फिर बाजार गया दौड़ लगाकर भाई फिर से यूरिया की कट्टी उठा लाया दिया धर के फसल और हरी भरी , और पोेधे की यूरिया बनाने की ग्रन्थियां सडा दी सत्यनाश कर दिया फसल का 
अब किसान भाई इल्ली की दवाई लेने गये खेत में इल्ली कुछ ओर और अन्य इल्ली मार ले आया वो भी घटिया कंपनियों की ओर डोस बताया कुछ और दिया धर के कुछ ओर अब इल्लिया रानी दवाई के प्रति सहन शील हो गई कोई दवाई का असर नहीं।

अब समय आता हैं फसल कटाई का और परिणाम.... 
अरे ये क्या हो रहा फसल को थ्रेसर में दबा दबा के डाल रहा है साला दाने किधर गए 
बगदा को तो ढेर लगी ग्यो दानो कथे ग्यों 
कथा का सार जैसे हमें भूख लगती है तो हम खाना खा के ही भूख शांत कर सकते है ना कि रात दिन दवाई गोली खा कर ..।
इसी प्रकार पोधों को 17 तरह के पोषक तत्व की आवश्यकता होती है निश्चित अनुपात में अच्छे उत्पादन के लिए , हम जमीन में गोबर की खाद या अन्य खाद तो देते नहीं यूरिया , डी ए पी आदि उर्वरकों को ही डालते रहते है वो भी जब मर्जी चाहे वो भी ना जाने कितनी मात्रा।
 सभी किसान भाइयों से निवेदन हैं कि आप बेबजह की रासायनिक दवाइयों का प्रयोग न करें और अतिरिक्त ख़र्च न करें।
आज के लिए इतना ही,
कहानी बहुत ही गहरी है इसे मजाक में ना ले समय पर संभल जाओ और ये किसी व्यक्ति विशेष हेतु नहीं है ये सामान्य घटना है अगर मेरे विचार बुरे लगे तो हांथ जोड़ कर छमा प्रार्थना।

सभी से विनम्र निवेदन हैं कि जानकार बने सतर्क रहें.....!
जय किसान

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