Sunday, March 8, 2020

घनजीवामृत तैयार करने की विधि एवं उपयोगिता



खेतों में रसायनों के अत्यधिक प्रयोग से किसानों की फसल लागत तो बढ़ती जा रही है किंतु उत्पादन एवं आय स्थिर हैं जिसका किसानों को नुकसान उठाना पड़ता हैं। रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से मृदा भी दूषित हो गई है एवं उसकी उत्पादन क्षमता या उपजाऊपन भी घट गया है जिस कारण किसानों का जैविक खेती, जीरो बजट खेती एवं प्राकृतिक खेती की तरफ रुझान बढ़ा है इसी को ध्यान में रखते हुए आज हम बात करने वाले हैं घनजीवामृत कि जो आपको उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खेत के उपजाऊपन को भी ठीक करने में मदद करेगा। घनजीवामृत को आप अपने घर पर भी बड़ी आसानी से बना सकते हैं।
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तैयार करने की विधि :




1. आवश्यक सामग्री :



  • 100  किलोग्राम देसी गाय का गोबर (cow dung
  •  देसी गाय का गोमूत्र (cow urine
  •  2 किलोग्राम चने का पाउडर या बेसन (Bengal gram powder)
  •  2 किलोग्राम गुड (Jaggery)
  •  मिट्टी  ( Hand full soil)

2. बनाने की विधि :


  • सबसे पहले गोबर के ऊपर गोमूत्र डालते हैं ।
  •  फिर थोड़ा थोड़ा करके अच्छे से बेसन को मिलाते हैं ।
  •  इसके बाद गुड़ को अच्छी तरह से मिलाते हैं ।
  • अब खेत की मिट्टी डालकर सभी को अच्छी तरह से मिश्रित कर लिया जाता है ।
  • अब मिश्रण के छोटे-छोटे उपले बनाकर 1 हफ्ते के लिए छांव में सुख आना चाहिए ।
  • 7 दिनों के बाद जब उपले सूख जाते हैं तो उन्हें अच्छी तरह से बारीक कर लेना चाहिए ।
  • इस प्रकार तैयार घनजीवामृत को 6 महीने तक स्टोर करके रख सकते हैं ।

घनजीवामृत के लाभ :


  • इसके प्रयोग से मृदा की उर्वरता में वृद्धि होती है।
  •  इसके प्रयोग से उत्पादन में वृद्धि होती है।
  •  इसके प्रयोग से मृदा में सूक्ष्मजीवों की संख्या में वृद्धि देखने को मिलती है।
  •  इसके प्रयोग से बीजों की अंकुरण क्षमता में वृद्धि होती है। मिट्टी की भौतिक दशाओं में भी सुधार देखने को मिलता है। पौधों में रोग प्रतिरोधी क्षमता का विकास होता है तथा पौधों में बीमारियों से लड़ने की क्षमता विकसित होती है। मृदा में सभी प्रकार के पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है। 
  • मृदा की भौतिक दिशाओं में सुधार होता है।

 उपयोग :


खेत खेत की जुताई के पश्चात घन जीवामृत का उपयोग अच्छा माना जाता है अतः तैयार किए गए घनजीवामृत के 20 किलोग्राम को 100 किलोग्राम गोबर खाद में मिलाकर 1 एकड़ खेत में डालते हैं। 
नमी के संपर्क में आते ही घनजीवामृत में मौजूद सूक्ष्मजीव सक्रिय हो जाते हैं।

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